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Saturday, 3 September 2011

एक ख्वाब में जी रहा है ....!



बस गया है 'कुछ' आँखों में

'वो' पलकों को सी रहा है ....

एक ख्वाब में जी रहा है ....!

'प्रिये' जो भी कहो ला दूंगा...

ज्यों पानी..रूपया उसी तरा है...

एक ख्वाब में जी रहा है ....!

घिरा जोमुश्किलों में..दादा कहेंगे...

रो मत ..भाई नहीं मरा है..

एक ख्वाब में जी रहा है ... !

बिटिया हुयी बड़ी अब...

'वो' अब भी उसी तरा है..

एक ख्वाब में जी रहा है ... !

'नहीं पीता' के माँ कहेगी...

'बेटा'फिर से 'पी' रहा है...

एक ख्वाब में जी रहा है ...!

संसद में बैठा 'अन्ना'..

'उसका'चेहरा खुशी भरा है....

एक ख्वाब में जी रहा है ... !

'जोड़ा' कुछ भी नहीं तो क्या..

'वो' सबकी ख़ुशी रहा है...

एक ख्वाब में जी रहा है ... !

रिश्वत पे बिगड़ा नेता...

'बे'.. ईमान नहीं मरा है...

एक ख्वाब में जी रहा है ... !

और

कह के 'किरण' की तरा सच एक दिन

वो भी कहेगा ...हाँ जी कहा है...

एक ख्वाब में जी रहा है... !

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