सच मानो नहीं!
तुमसे प्यार नहीं था मुझे,
तुम्हारे लिए कभी तडपा भी नही मैं.
वो सब,
मैने झूठ कहा था,
और अच्च्छा ही हुआ,
के ,तुमने भी सब झूठ ही माना.
पर……..
पर,अब तो तुम खुश हो ना..
मेरी तरह उदास,
या,परेशान तो नही रहती ना,
सच ना कह पाने का अपराध-बोध,
तुम्हे कचोटता तो नही रहता ना.
या फिर मेरी तरह,
अफ़सोस तो नही मनाती ,
एक सच के झूठ साबित हो जाने का..
सच-सच कहो,
तुम खुश हो ना…

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